इण नै माता रै पेट सुणी, इण नै पीढे पर लेट
सुणी,
पीळे पोतङियां मेँ पळकर, दायी-
दादी री कथा गुणी,
दादै रै हरख दुलारां मेँ, नानै रै माखण
न्हयारां मेँ,
मामै-मामी री प्यारां में, बाबलियै रै
बुचकारां मेँ,
नानी री कहाणी तो ओजूं, आखां नै आज
जबानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है॥1॥
भाई-भैणा में नाच-कूद, रंग आंख
मीँचणी रमता हा,
जागण-जम्मा अर रतजग्गा, जद सुण नै खातर
जमता हा,
पोसाळ पधारया गुरुवां री, मूंढै माथै
मरुवाणी ही,
जिण रै जरियै ही सूं सगळां,
हिन्दी अंग्रेजी जाणी ही,
जिनङी री मोटी नीव जमी, रूं-रूं मेँ
रमी दिवानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥2॥
इण में वीरां री वात मिलै, इण मेँ जौहर
री ख्यात खिलै,
चारण जैन्यां री चेतनता,
लिखियोङी पोथ्यां जोत झिलै,
सैणां-नैणां रो ग्यान लियां,
दातारी रो सणमाण दियां,
दिलदारी अक्कल में ऊंची, विस्वै में व्यापक
नांव कियां,
जिण सूं देवा-लेवो सीख्या, बड मायङ
भासा मानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥3॥
सेवा-सट्टां री सेनाणी, बीजक
हुंड्या री हेमाणी,
दरबारी पट्टां-पतरां री, नवनीत-रीत
री नेमाणी,
आसाम, ममोई ना अटकी, नंनण रै
खेती जा खटकी,
सिक्कम-गांटुक रै गैला मेँ, वाणिज मेँ
बिजली सी कटकी,
जग जीवट आदू अण्णभै सूं, पाई धाखङ
जिनगानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है॥4॥
रही माऊ कळाकारां री, है हाऊ दुसमण
सारां री,
आ: ताऊ तामसकारां री, नातेली सागण
न्हारां री,
सुख री भोमी री साख चि'णो,
मीठी मधरी नग आंख मिणो,
धन राजस्थान सुख रुप धनी, मन-माळव मात
जबान गिणो,
भासां रै इतिहासां उज्जळ, विग्यान
मनां रजधानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥5॥
प्राचीन काळ सूं सरस पगी,
हिन्दी साहित री नींव लगी,
भल सौरसेनी अप भ्रंस जणी, जिण सूं
ही ब्रज अर खङी जगी,
रासां री रीत पुराणी है,
सन्तां म्हंता पैंचाणी है,
गाथां गीतां रा भेद घणा, हद गौरव
पुखता पाणी है,
जूनापै में कुण होङ करै, गद्य-जात सैंग
लजखानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥6॥
गुरुदेव रवीन्द्र सुण रीझयो, मैमा माळवीय
हांफीज्यो,
सर टॉड ग्रियर्सन दिल सीज्यो,
तैसीतोरी भणकर भीज्यो,
चाटुरज्या इण नै चावै है, धीरेन्दर जी मन
भावै है,
गुण गावै भासा विग्यानी, दो क्रोङ
मिनख मूं बावै है,
देखण नै दुनिया राजी है, भाजी आवै इण
कानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥7॥
ख्यातां-वातां रा भंडारा, बचनिका,
वेलि रा गुण न्यारा,
भरपूर भारती दसा-रसां, परवाद सतसई सै
प्यारा,
सतरंगी साहित धारा है, लेखक
कवियां री करणी है,
भवसागर पार उतरणी है, भावां गुण-
गरिमा-तरणी है,
ओंळमै, कळायण, कुरजां, लू, मरुवाणी वीर-
भवानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है॥8॥
इण सूं ही बाबू साहब वणै, अर अवस वडा नर
वाजै है,
खावां-भावां, पैनावां री, रग-रग में
भासा साजै है,
संस्करती सब्दा सागण है, पर
परकरती बदळावै है,
मां दूध तणा जो तत्व मिलै, कद
छयाळी दूधां पावै है,
पण आदत सूं मजबूर हुया, गळ गिट-पिट राग
मिलानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥9॥
मायङ रो दरजो ऊंचो है, मायङ रो करज
समूचो है,
कुण काढै इण मेँ खूंचो है, लिखतां कुण पकङै
पूंचो है,
पर आः बूढी माता दाई है, दूजोङी धण
जोबन छाई है,
हम-तम, इंगलिस अपणावणियां, मायङ सूं लज
मैमा पाई है,
कळजुग मेँ हुया कपूत घणा,
जो बहुवां रा वरदानी है।
क्यूं भूल रिया निज भासा नै, जो मायङ
राजस्थानी है ॥10॥
- सा. म. श्री नानूराम संस्कर्ता
Ledger Typed by - Dr. Madan Gopal
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