आज हरिया खेतां मेँ छाँवला आवै
आभै लील गळै, वादळां री नौका कुण चलावै?
आज भँवरा फूलां नीँ बैठै; थाँरी जोत किरणा मेँ
मतवाळा ऊँचा उडै-चढै !
चातकङां रा जोङा, सरिता रै स्हारै कैयां भेळा होरया है?
साथीङा आज म्हैँ घर नीँ जावूँला।
आज म्हैँ आभै झाङ, विश्व विभव लूंटणो चावूं।
आज समदरियै री उछाळ मेँ झाग वणावूं; झंझावात-हरखीली हंसी हंसै!
आज बेवजै मुरळी बाजै-सारो दिन म्हैँ वै मेँ ही लगावूंला!
स्व. गुरुदेव नानूराम जी सँस्कर्ता की रचना 'गीतमाळा' सूं

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