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Tuesday, 8 November 2011

मेरी अभिलाषा

पापा कहते बनो डॉक्टर
मां कहती इंजीनियर।
भैया कहते इससे अच्छा
सीखो तुम कम्प्यूटर।
चाचा कहते बनो प्रोफेसर
चाची कहती बनो अफसर।
दीदी कहती आगे चलकर
बनना तुम्हेँ कलेक्टर।
बाबा कहते फौज मेँ जाकर
जग मेँ नाम कमाओ।
दादी कहती घर मेँ रहकर
ही तुम उद्योग लगाओ।
सबकी अलग-अलग अभिलाषा
सबका अपना नाता।
लेकिन मेरे मन की उलझन
कोई समझ न पाता।

-शनू पाण्डेय

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