सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैँ
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे सवाल की तरह
काम पर क्योँ जा रहे हैँ बच्चे?
क्या अंतरिक्ष मेँ गिर गई हैँ सारी गेँदेँ
क्या दीमकोँ ने खा लिया है
सारी रंग बिरंगी किताबोँ को
क्या काले पहाङ के नीचे दब गए हैँ सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैँ
सारे मदरसोँ की इमारतें
क्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरोँ के आँगन
खत्म हो गए हैँ एकाएक
तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया मेँ?
कितना भयानक होता अगल ऐसा होता
भयानक है लेकिन इससे भी ज़्यादा यह
कि हैँ सारी चीजेँ हस्बमामूल
पर दुनिया की हज़ारोँ सड़कोँ से गुजरते हुए
बच्चे, बहुत छोटे छोटे बच्चे
काम पर जा रहे हैँ।
-राजेश जोशी


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