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Sunday, 13 November 2011

उडीकै है पींपळ

उजड़्योड़ै कुंभाणै री
गुवाड़ में ऊभो
ओ पींपळ
फ़गत एक रूंख कोनी
गांव रै बडेरै गळांई है
जको लारै छूटग्यो.
इकचालीस रै साल
तोपाभ्यास सारू
जिण चौंतीस गांवां री जमीं
सेना नै सूंपीजी
उण में एक हो कुंभाणो.
गांव जैड़ो गांव हो कुंभाणो
जीतो जागतो
एक काळजै धड़कतो गांव
सवा सौ घरां री बस्ती
जठे पड़तख दीसता
जूण रा हजार रंग.
ठाकुर जी रै मिंदर रै नगाड़ै सागै
ऊगतो हो दिन
अर इण पींपळ हेठै ई
गुरबत बिचाळै बिसूंजतो
भोर सू आथण तांई
खेत रो खोरसो
डांगरा री टंडवाळी
आसरा री सार-संभाळ
तीज-तिंवार रा नेगचार
सांचाणी सतरंगी हो
जीवण रो आंगणो.
पींपळ रै डावै पासै
भंवरियै कुवै माथै
पणिहारियां री लेण कोनी टूटती
गौर पूजण
जद गांव री छोरिया-छापरियां
पींपळ हेठै भेळी हुय'र
गीतां रा सुर छेड़ती
उण घड़ी पींपळ रै हिवड़ै
उमाव मावड़तो कोनी
काती में भोरानभोर
गांव री लुगायां
भजनां भेळी
पैलपोत
पींपळ ई सींचती.
पण अबै कठै बो कुंभाणो
हणै तो साव उजाड़ है
ओळूं नै टाळ'र'
जमींदोट हुयोड़ा ढूंढां
बिना छात रा आसरा
बिना भींतां री बाखळ
माणस बिहूणो
बांडो बूचो गांव
घणो अणखावणो लागै.
अबै कोनी सुणीजै
दिन छिपतां ई
बावड़तै पसुवां री टण-टणाट
कोनी दीसै
पोसाळ में टाबरियां रा टोळ
फ़गत हवा री सूंसाट
मून सागै
बाथेड़ो करती लखावै.
कुंभाणै रै एनाणां री
साव एकलो
रुखाळी करतो
बूढ़ियो पींपळ ई
अणमनो-सो दिन टिपावै
जाणै डोकरो
उडीकतो हुवै
कै कदी कोई
नूंवो परणीज्योड़ो जोड़ो
गंठजोड़ै री जात रै मिस
उणै हेठै आय'र बैठ जावै
अर बडेरो पींपळ
आसीस रै ओळांवै
आपरी बच्योड़ी उमर सूंप'र
मुगत हुय जावै.

1 comment:

  1. वाह सा गंगाधर जी, धिन्वाद.
    आपरो गाँव छूटे जड़ हिरदो कियां आपरो दुखदो साम्भ्ले. पण के कार्यो जा सके, जीनो तो पडसी, भलेस आप्रे गाँव ऋ पुराणी मीठी यादां साथै ही. - Murli Ojha (Saraswat), Napasar

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